भाषा / Language
प्रेमी वो भी तो हैं
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प्रेमी वो भी तो हैं....
जो कभी आते नहीं
कहते नहीं
कभी छूते नहीं
मिलते नहीं
पर डूबे रहते हैं
बिना पानी की डूब
अदृश्य बंध
अबोली गंध
प्रेम अपने सर्वस्व से सर्व दे दे कर स्व के निर्माण की अविरल आस्था है।
जाने किसका इंतज़ार है.....असीम😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें