कल्पनाशब्दों के बीच
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आज पहली बार भव्या का आर्टिकल The Australia Today में पब्लि…

आज पहली बार भव्या का आर्टिकल The Australia Today में पब्लिश हुआ। पंखों में उड़ान कायम रहे तुम्हारी। वो कहना लिखना सीखो जो आवाज़ बने ...मन छुए..... प्रश्न पैदा करे। हर प्रयास तुम्हारा है।हर ख़्वाब भी तुम्हारा। हर सीख तुम्हारी है। हर हार तुम्हारी है। इसमें लगी जुगत और शिद्दत भी तुम्हारी है।तो ज़ाहिर है ये जीत भी तुम्हारी है। मेरा बस संतोष है कि तुम वहां अकेले रहते लड़ते थकी नहीं । मायूस हुई पर मेरी बातों ने तुम में फिर ऊर्जा भर दी।तुम फाइटर हो ....हमेशा यही रहना। ये पहली बार ही हर बार होता जाता है। अगर कायम रहो। जुड़ी रहना.....सच से,चाहना से,जिद्द से और अपने आप से। आशा है इसके फलस्वरूप तुम्हें वो मिल जाये जो तुम ख़्वाब बुन रही.... internship.💐💐💐 मेरी सबसे जिगरी को खूब प्यार। माँ Bhavya Pandey 💐 लिंक साँझा कर रही।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें