कल्पनाशब्दों के बीच
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कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा

कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा.... एक कतरे को समंदर नज़र आएं कैसे तेरे मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएं कैसे वसीम बरेलवी जी इन दिनों बस कविता सेठ जी की आवाज़ की दीवानगी है। आंखें बंद कर उनकी आवाज़ की गूंज मुझे किसी और जहां में ले जाती है। घंटों वहां से लौट कर वापस नहीं आती। In love with my solitude and her soulful voice .... साँझा कर रही.... अपनी आवारगी तस्वीर .... बस एक और दिन का गुज़र जाना है। बाक़ी कुछ नहीं।😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें