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मैं कई दफ़े कई चेहरों के प्रेम में पड़ती रही

मैं कई दफ़े कई चेहरों के प्रेम में पड़ती रही.... बाज़दफ़ा मुस्कुराई... पर दिल उन दो आँखों पर हार गई। जादू उस रोज़ उनके नाम कर दिया। फिर एक अक्षर कई बार लिख लिख कर प्रेम माला पिरोई। अब प्रेम और उदासी का हक़ किसका है... जी जानता है। तू मेरे सामने है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें