कल्पनाशब्दों के बीच
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लिखा तो कुछ भी नहीं है

लिखा तो कुछ भी नहीं है.... ये कुछ संवाद की बेलें हैं जिनमें अब एकांत का फूल चटक गया है। ख़ालीपन में बसन्त आने को है। I love to write ......Nothingness *ये पान की बेल है । माँ के घर में आंगन में लगी है । हर पत्ते पर प्रेम लिखा है। अगर देख सको तो... अगर सुन पाओ तो... 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें