ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2898

भाषा / Language

लिखा तो कुछ भी नहीं है

✦
लिखा तो कुछ भी नहीं है.... ये कुछ संवाद की बेलें हैं जिनमें अब एकांत का फूल चटक गया है। ख़ालीपन में बसन्त आने को है। I love to write ......Nothingness *ये पान की बेल है । माँ के घर में आंगन में लगी है । हर पत्ते पर प्रेम लिखा है। अगर देख सको तो... अगर सुन पाओ तो... 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें