भाषा / Language
हाँ जैसा हाँ न कहा करो
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*हाँ जैसा हाँ न कहा करो ....
ना लगता है।
आप अपने young days में कितनी खूबसूरत लगती होंगी न maam ..... एक पाठक ने कहा
मैंने कहा... नहीं रे !इस उम्र में मैं अब ज्यादा बेहतर मानती हूँ खुद को.... बस चार साल में अर्ध शतक की तैयारी है।
उम्र के साथ मन ज़्यादा सुंदर हो गया है ।अब सोखता ज्यादा है। चाहना बेहिसाब हैं।
आँखें ज्यादा पहचानती हैं। मुस्कान टटोल कर पहुंचती है।
रंग और रंगत रुक गयी है ...धोखाधड़ी कम करती है ये वाली शक़्ल😊😊😊
अब दूसरों की बातों की खुश्बू से पहचान लेती हूँ कि खिचड़ी पकेगी या बिरयानी या झोल भात निकलेगा।
मेरी बात सुनकर ....उसने बाप रे....कहा और हँस पड़ा।
फूल वाले इमोजी के साथ दिल वाले इमोजी भी उड़ा दिए। 😊😊😊😊
मैंने कहा.....तुम शुक्रिया रख लो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें