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हमने कई चाँद ....कई सूरज तोड़ कर हथेलियों पर तारे उगाए

हमने कई चाँद ....कई सूरज तोड़ कर हथेलियों पर तारे उगाए पर हम कभी न उगा सके एक साँझी प्रेम लकीर हम दोनों ही अच्छे जादूगर नहीं थे। *तस्वीर कल शाम की है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें