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मैंने अमूमन रोज़ कहा

मैंने अमूमन रोज़ कहा.... मैं तुमसे प्रेम करती हूँ उसने अपनी हाँ कभी न दी.... ये सोच कर कि मैं उसे ऐसा कहना किसी रोज़ बंद न कर दूं। उसकी ये बात जब तक समझ आयी तब तक मेरे पास उसकी ना का एक बड़ा रेगिस्तानी टीला बन चुका था । अब उसमें रोज़ एक हाँ खिली रहती है। अब नहीं कहती ....मुझे तुमसे प्रेम है।😊
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