कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2877

भाषा / Language

तुमसे सूखे पत्तों सा रिश्ता है

तुमसे सूखे पत्तों सा रिश्ता है.... इकतरफ़ा संवाद वाला एक दुःख ही है जो आधा नहीं होता।💐💐💐💐 सुबह छत बुहारते हुए एक अकेली सूखी शाख दिखी ।मुझे मन हुआ कि उसका अकेलापन बाँट लूँ।उसकी तस्वीर खींच ली। अगले ही पल जब इसे बुहारने लगी तो ये एक बार में ही इतनी symmmetry में अपने आप बिखर गई। यकीन न हुआ।😊 अबकी खुद को खुश करने के लिए तस्वीर ली। शायद शाख ने मुझे शुक्रिया कहा। ऐसा मुझे लगा।😊😊 उदास आंखों को अपने अलावा कोई भी उदासी नकार देनी चाहिए। सच है ..... दिल धड़कते हैं उनके भी जो ढोंग करते हैं कि कुछ भी तो नहीं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें