भाषा / Language
कविता
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कविता....
*कुछ तावीजों पर मन्नत बँधी रह जाती है
जैसे उदास मन पर शोख़ कविता
*ज्यादातर कविताएं अक्षर पहना पसंद करती हैं.....
बस कुछ एक मौन ढाँक लेती हैं।
*सफ़र खत्म नहीं होता ....
बस सीढ़ियां रुक जाती हैं
कविता ठीक ज़िन्दगी की तर्ज़ पर चलती है।
*मेरे पास अब बस चुटकी सा दिन बचा है
अपनी रात में मिला लो ।
स्त्री रोज़ एक ही कविता कहती है ...
थकान से।
*तुममें से प्रेम नहीं कविता चुन लेती हूँ ....
प्रेम में खुद रच लेती हूँ
एक बार तुम भी कहो..….कल्पना।😊
शुभरात💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें