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याद का कोई तय समय नहीं होता

याद का कोई तय समय नहीं होता.. सुबह सुबह योग करते वक़्त हैडफ़ोन पर एक प्लेलिस्ट बजती रहती है। मुस्कुराती हुई आंखें बंद कर एक दूर सफ़र में निकल जाती हूँ। तुम साथ होते हो या नहीं....ये मेरी मुस्कान में बूझने वाली बातें हैं। तस्वीरें बासी ताज़ी हैं .... जैसी हर सुबह होती हूँ ...याद में घुली घुली....बिल्कुल सादी खूबसूरत ....आदतें होती हैं।जैसे तुम😊😊😊 योग की आदत अपनाएं... कमेंट रहने दीजिए।💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें