भाषा / Language
ज़िन्दगी अपना पता कभी नहीं बताती
✦
ज़िन्दगी अपना पता कभी नहीं बताती
बस सुख - दुःख से सनी दो हथेलियां छाप देती है ....
कभी पीठ पर
कभी गालों पर
*अभी मैं तुमको बादलों के पार देख रही।
तुम भी देखो ना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें