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ज़िन्दगी अपना पता कभी नहीं बताती

ज़िन्दगी अपना पता कभी नहीं बताती बस सुख - दुःख से सनी दो हथेलियां छाप देती है .... कभी पीठ पर कभी गालों पर *अभी मैं तुमको बादलों के पार देख रही। तुम भी देखो ना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें