कल्पनाशब्दों के बीच
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हमारे बीच रास्ते ही रास्ते थे

हमारे बीच रास्ते ही रास्ते थे ...... राह नहीं थी चाँद ने जादू फूंका ही नहीं तितली भी अनजान रही *इधर दो दिनों से बारिश का मौसम बस बना हुआ है। रुका मंज़र है .....छत पर हूँ ...हैडफ़ोन पर रेशमा जी का..... लंबी जुदाई लूप पर लगा है। जाने कितनी बार चलेगा। Perfect song ...💐💐💐 सुनें..... *तस्वीर दक्षु ने ली है ये कह कर कि आप आज पतली पतली कैसे लग रही हो। चलो अब मेरे लिए मैग्गी बना दो।😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें