कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2826

भाषा / Language

तुमसे नहीं

*तुमसे नहीं ... ये हमारे बीच का जो कुछ नहीं है ना....वो फ़रेबी है मुझे उससे मिलना है। *तुमने हमेशा मेरी तरफ अपनी चुप्पियां सरकाई। तुम से ऊब कर अब उनके प्रेम में पड़ गयी हूँ.... तुम से एक रोज़ छूट जाऊंगी चुपके चुपके *दुनिया को ज़माना होते देर ही क्या लगती है ? बस नज़रें ही तो फेरनी है। तुम ने फेर ली मैं भी सीख लूँगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें