भाषा / Language
मैं किसी और का नहीं कह सकती अपना मन कहूँगी
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मैं किसी और का नहीं कह सकती अपना मन कहूँगी....
नींद हमारे सच्चे और सरल होने का पैमाना है। आप किस हद तक दुःख और सुख को बैलेंस कर पाते हो आपकी नींद इसका ब्यौरा दे सकती है।
आपकी नींद का स्वाद बता सकता है कि आप इंसान कैसे हो।
ये बहुत सुंदर है कि तुम नींद में जाग सकते हो.....इस जाग को चाहना नाम दूँगी ।
नींद हमारा एक ऐसा वक़्त एक ऐसा एकांत है जिसमें हम जो चाहे कर सकते हैं। जिसके साथ चाहे हो सकते हैं।ये जगह भी है और वजह भी कि मुझे प्रेम करने के लिए इससे मकबूल जगह नहीं मिलती।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें