कल्पनाशब्दों के बीच
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आज एक घंटा अपने बच्चों से बात की ....उनको पहाड़ और नज़ारे दि…

आज एक घंटा अपने बच्चों से बात की ....उनको पहाड़ और नज़ारे दिखाए। छत से खुला आसमान ,पेड़, फूल दिखाए। उनकी बातें सुनी। गीत सुने। मैंने भी उनको ईश्वर फ़िल्म का गीत कौशल्या मैं तेरी तू मेरा राम .....सुनाया। मन प्रसन्न हो गया। वो सब भी बहुत खुश हो गये। आशा का संचार हो गया। मुस्कान की अदलाबदली हो गयी। समर्थ ने ये वक़्त न ठहरा है ...ये वक़्त न ठहरेगा गा कर मेरा विश्वास और मजबूत कर दिया। एक प्यारी सी बिटिया ने मेरा गीत सुन कर मेरे लिए.... मेरा यार हँस रहा है ...बारिश की जाए गीत गाकर मुझे dedicate किया।😊😊😊😊 वीडियो पर ही सही बच्चों के मासूम चेहरे दिखे।ये ऊर्जा का विशाल सागर हैं। जब पूछा.... कैसे हो ? छुट्टियां कैसी जा रही? सब ने कहा अच्छे हैं ।छुट्टियां अच्छी जा रहीं। जब कि मन जानता है कि वो सब भी लड़ाई लड़ रहे। दुःख छिपाना बच्चे भी सीख गए इस महामारी में। हम फिर जल्द मिलेंगे और वो मेरे लिए ....मैं उनके लिए अच्छे रहने वाले हैं। वादे हैं .....पर पक्के मन वालों ने किए हैं😊😊😊 * उस समय वाली मुस्कान क़ैद की है कि आजकल यही सबसे ज्यादा महंगी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें