कल्पनाशब्दों के बीच
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इस दौर में भी कुछ न करके भी अगर अपनी दुनिया के लिए कुछ करना…

इस दौर में भी कुछ न करके भी अगर अपनी दुनिया के लिए कुछ करना चाहते हो तो सकारात्मक रहो..... जो है वो तो है ही है। जो हम हैं वो भी तो कोई नहीं। एक हर्षित इंसान ही सुबह देखने की कुव्वत रखता है। डगमग डगमग नहीं .... जगमग जगमग रहिये💐💐💐💐 अपना आरोग्य थामे रहिये।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें