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दो सितारों का मिलन....💐💐💐💐

दो सितारों का मिलन....💐💐💐💐 आज मेरे माँ पिताजी की पचासवीं शादी की सालगिरह है। गोल्डन जुबली नहीं.... Golden ratio😊😊😊 दोनों का साथ बना रहे। ईश्वर इनके सूत्र को मजबूत रखे। ये दो ऐसे वृक्ष और बेल हैं कि इनको साथ होना ही था। मैंने इन दोनों को ही बारी बारी से वृक्ष और बेल होते हुए देखा है। जब मां वृक्ष होती है तो daddyji चाहे अनचाहे बेल हो ही जाते हैं। और मां तो मां है ... वो ज्यादातर बेल होकर भी वृक्ष सा आभास देती है । इनको एक दूसरे को देखते हुए मैंने ये देखा है कि मेरे पिता बेहद कर्मठ, बेहद मेहनती,जुनूनी, कल की चिंता करने वाले , बहुत ज्यादा systematic, थोड़े गुस्सेल पर बेहद भावुक इंसान हैं। मेरी मां बेहद शांत,संवेदनशील, बेहद सुलझी हुई, carefree, आज को जीने वाली, सच और सोच को दूर से पहचानने वाली, सागर की तरह गहरी, बिल्कुल निष्पक्ष और एक मजबूत दीवार रही है। उनको मान देना आता है और मान लेना भी। आज याद करती हूँ तो मैंने इन्हें दो अलग मजबूत लोगों की तरह ही पाया है जो एक दूसरे के सामने अंत में मोम हो ही जाते हैं। यही इनके अविरल होने की कुँजी है। ये बिना पढ़ाए जाने वाले पाठ हैं दोनों... इनको बस देख कर सीखा जा सकता है। मैं बेटी होकर और क्या कहूँ..... यह कह सकती हूँ कि मेरे असीम को ये दोनों परिभाषित करते हैं। मुझे ईश्वर नहीं दिखा पर दो अक्षय लोग दिखे जिन्होंने मेरे और भाई के लिए कभी कुछ भी कम न होने दिया। ज़िन्दगी इनको ही देख कर सीखी है।सब कुछ आप दोनों का ही दिया हुआ है। माँ की तरह गहरी और daddy के समान बेहद जुनूनी रहूँ। हमेशा बने रहिये💐💐💐💐 लड़ते झगड़ते..... कहते सुनते.....मानते मनाते....हँसते हँसाते ....गाते गुनगुनाते *भाई और मैंने बहुत कुछ सोचा था कि इस दिन को यादगार बनाएंगे पर वक़्त ने रोड़ा रख दिया।कोई नहीं .... एक रोज़ जल्द कभी😊😊😊 तब तक यूँ ही मुस्कुराते रहो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें