भाषा / Language
संभाल कर रख देती हूँ .... रोज़ तुम्हारा इंतज़ार
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*संभाल कर रख देती हूँ .... रोज़ तुम्हारा इंतज़ार
फिर कल के लिए
सुनो! मैं हार नहीं मानती।
मयस्सर नहीं तुम मुझे हासिल पसंद हो।
शुभरात 💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें