भाषा / Language
आज तुम मिल गयी Baabusha Kohli ..दस मिनट तक तो किताब को सीने…
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आज तुम मिल गयी Baabusha Kohli ..दस मिनट तक तो किताब को सीने से लगा कर रखा। आँख बंद कर मुस्कुराती रही।
फिर किताब के मुख्यपृष्ठ जहां तुम्हारा नाम और भाप के घर में शीशे की लड़की लिखा है उस उभार पर उँगली फिरा कर देखा। ऐसा लगा तुमको स्पर्श किया।
सब कुछ कितना सुंदर ...
आवरण का चित्र.... तुम्हारी किताब के पीछे बनी तुम्हारी तस्वीर ...यह प्रेम से पगा हुआ तुम्हारे नाम का बुकमार्क😊😊😊
खूब खूब शुभकामनाएं...
अनुराग जी को भी शुभकामनाएं और ढ़ेर सारा शुक्रिया। पहाड़ों पर बाबुषा का जादू मेरे साथ रहेगा। पढ़ कर मन जरूर लिखूँगी।
जैसा सा मुझे आता है ....
तुमको बहुत बहुत बहुत प्यार...
My favourite she writer💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें