कल्पनाशब्दों के बीच
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वक़्त से बड़ा विरोधाभासी कोई नहीं

वक़्त से बड़ा विरोधाभासी कोई नहीं.... वो अपना समय ले रहा। आप भी मजबूती से "वक़्त" के नुक़्ते को पकड़े रहिये.... बस कुछ दिन बाद " ज़िन्दगी" में मिलकर लगाएंगे। तब तक उदासी को जितना हो सके पीछे धकेलते रहो। हँस नहीं पा रहे पता है ... पर अपने मित्रों को स्माइली जरूर भेज दो। वो शायद तुम्हारी ही राह देख रहा हो।😊😊😊😊 *तस्वीर अभी क्लास के वक़्त की है ।आज एक बच्चे ने कहा ... चश्मे में आप बड़े बड़े लग रहे । आप मुझे बिना चश्मे के अच्छी लगती हो।आप स्कूल में चश्मा मत पहन कर आना। 😊😊 जब दुनिया में इतनी मासूमियत बची हो तो आप को निराश नहीं होना चाहिए। हमें दुःख छुपाने का हुनर फैलाना आना चाहिए।😊 साथ रहना अच्छे रहना। ख़्याल रखना। मैं भी तुम्हारे लिए अपना ख्याल रखूंगी । 💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें