भाषा / Language
तुमसे हमेशा वक़्त की दरकार रही
✦
तुमसे हमेशा वक़्त की दरकार रही....
मन कहा जाना चाहिए...कहती रहूँगी।
मन है कि कहीं साथ बैठकर किसी बांस को रोज़ बढ़ते हुए देखूँ ।
देखूँ कि आसमान का आज कौन सा तारा छिटक कर तुम्हारे तिल को रोशन कर रहा।
तुम्हारे साथ बैठूं तो गिनती रहूँ कि कितनी बार तुमने आसमान को देख कर खुदा को शुकराना कहा।
इस फेर मिलोगे तो रेत घड़ी गिरा कर आढ़ी कर दूंगी।
न वक़्त इधर आएगा न उधर जाने दूँगी।
😊
*आज दिन बेहद उदास था... ऐसे कि जैसे छाती पर किसी ने पत्थर रख दिया हो। क्लास लेने के बाद पसंदीदा प्लेलिस्ट हैडफ़ोन पर लगाकर आंखें बंद कर लेटी रही। जितनी बार एम्बुलेंस की आवाज़ सुनाई देती कान बंद कर ईश्वर रक्षा करना मुँह से निकलता रहा।
कहीं मन नहीं लगा। फिर फ़ोन में दोस्तों की तस्वीरें देखने लगी। हम साथ मुस्कुराते हुए कितने प्यारे लगते हैं।
वही मुस्कान सरक कर मेरे होंठों पर आ गई।
पुराने दिन जल्द लौटे।
😊
लिखने लगी तो ये ख़्याल तैर गया।
अच्छे रहना💐
शुभरात💐💐💐💐
उदास तस्वीर क्या लगाना।मुस्कुराती हुई सब पुरानी हो गई😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें