कल्पनाशब्दों के बीच
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ऐसे ही दिनों के लिए हमने अपनी हिम्मत और अपनी ऊर्जा बचा रखी है।

ऐसे ही दिनों के लिए हमने अपनी हिम्मत और अपनी ऊर्जा बचा रखी है। हमें बहुत दूर जाना है।मुस्कुराते ,हाल पूछते ,हथेलियां थामे रहो। बस कुछ ही दिनों की बात है । संगत रंगत लाएगी। छोर के उस तरफ आरोग्य है। रोग हर पल हर कदम शिथिल पड़ रहा। हमारी हिम्मत ,हमारी मुस्कान, हमारी ज़िद्द उसे डरा रही। वो सिकुड़ जाएगा हम प्रयासरत हैं। समाधान नहीं ....रोकथाम पर ज़ोर दें। नाल काट कर अलग करें। जीवन वहीं हैं ..आज़ाद कल भी हम सूद समेत वापस लेंगे वो यारियां .....वो यायावरी बस थामे रहिये मेरे साथ ये विश्वास की डोर अच्छा कहें अच्छा सोचें..... इस वक़्त बस वही आपके लिए ऑक्सीजन है। सब अच्छे रहना💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें