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रचना 2748

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उन्मुक्त

उन्मुक्त....... लडक़ी को तितली औरत को पतंग और स्त्री को हवा होना चाहिए... इसी जन्म में ....लड़के ने कहा तितली और हवा तो ठीक है पर पतंग सी औरत उन्मुक्त कैसे होगी? लड़की ने तपाक से पूछा प्रेम करके ..लड़के ने लड़की को पास बैठाते हुए कहा। किससे प्रेम करे औरत? डोर से या उस हाथ से जिसमें डोर है? लड़की ने गले में बाहें डाल कर पूछा लड़के ने माथा चूम कर कहा जो डोर तुम्हें बांधे उसे पहले फेर में छोड़ दो। जिस पर तुम अपना सूफी ताबीज़ बाँध दो उससे लिपट जाओ । अहा क्या बात !...कहकर लड़की ने उसी वक़्त अपनी डायरी में लिखा ... सूफ़ी ताबीज़ वाली औरत लड़के ने अपनी डायरी में लिखा... तीन रंग का मिराज और दोनों गले लगकर हँस पड़े। शुभरात💐 तुम अच्छे रहना । 💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें