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रचना 2743

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दो हाथों और एक मन से आगे बढ़ कर मदद करने वालों को मेरा नमन

दो हाथों और एक मन से आगे बढ़ कर मदद करने वालों को मेरा नमन .... आप को दिख नहीं रहा होगा पर इस घोर समय में भी हमारे आसपास देवता बढ़ रहे। दिन रात प्रयास कर रहे। देवताओं के प्रयासों को सराहें... उनको रेखांकित कीजिये। रोग कम करने में उनका हौसला बनिये। घर रह कर... मास्क लगाकर अगर आप छोटे मोटे गण भी बन रहे तो आप इस धरा को बचा रहे। कोरोना को थोड़े ही पता है कि पास नहीं जाना है। आपको पता है तो रहिये दूर। संक्रमण की कड़ी न बनिए। पुल तोड़िये। बाँध बांधिए। रोग सूख रहा। एक रोज़ नहीं रहेगा। आमीन💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें