कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2737

भाषा / Language

एक शहर है

एक शहर है उजड़ा सा एक बस्ती है अधूरी सी एक मुहल्ला है उदास सा एक दीवार है अकेली सी एक मन है चुप सा बस स्मृतियाँ हैं .... आवारा सी जिनका दिशाबोध अभी बचा है इन्हीं में कण बन तुम आ जाते हो रोज़ इधर इस जंगल में बेमौसमी बारिश हो रही मैं न बीत पाती हूँ न रीत पाती हूँ। कोई विकल्प खुले नहीं.... प्रेम एक षड्यंत्र है..... इस समय का सबसे अवांछित षड्यंत्र *तस्वीर में मेरी धूप मेरी छांव तुम ही हो। मेरे पास और कोई पता और कोई नाम है ही नहीं।ये ऐसे ही कितना सुंदर है ।है ना? तुम्हारे पास है कोई और नाम ....कोई और अक्षर?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें