कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2707

भाषा / Language

एक रात है

एक रात है एक ख़्वाब कभी तुम कभी मैं मैं अक्सर इन दोनों को जोड़े में ही देखती हूँ। मखमली सिरहाने पर इनकी झेंपती, हँसती ,चूमती परछाई मुझे खुद पर लेप लगती है। मैं नींद में मुस्कुराती हूँ... तुम संग
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें