भाषा / Language
एक रात है
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एक रात है
एक ख़्वाब
कभी तुम
कभी मैं
मैं अक्सर इन दोनों को जोड़े में ही देखती हूँ।
मखमली सिरहाने पर इनकी झेंपती, हँसती ,चूमती परछाई मुझे खुद पर लेप लगती है।
मैं नींद में मुस्कुराती हूँ...
तुम संग
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें