कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम्हारा कुछ न कहना

तुम्हारा कुछ न कहना .... मेरी लिए उम्मीद है इसे यूँ ही चुप रखना मुझे मरने न देना। *लहर कभी नहीं मरती आवारा ....अल्हड़ जो है। सदा रहेगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें