कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2691

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दुनिया हमारे आगे चाहे मुस्कुराती हो पर पीछे हँसती है

दुनिया हमारे आगे चाहे मुस्कुराती हो पर पीछे हँसती है.... अपनी बखिया खुद उधेड़ा कर कल्पना नोंक न खोजा कर दफ़ा कर खुद रफूगर बन सीख दुःख सुख सजाना ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें