कल्पनाशब्दों के बीच
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तुम्हारे माथे पर सलवटें उभर आई हैं ... उम्र दिखने लगी है।

तुम्हारे माथे पर सलवटें उभर आई हैं ... उम्र दिखने लगी है। सही तो है अबके जब तुम माथा चूमोगे तो चुम्बन सुलेख में छपेगा। महीन लाइन्स के बीचों बीच सुंदर लिखा हुआ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें