भाषा / Language
जिस पल मन आँखों में हो और आंखें ढूंढे कोई मन
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जिस पल मन आँखों में हो और आंखें ढूंढे कोई मन ....
ये वही तस्वीर है।
मैंने अपनी परी को पर के अलावा कुछ न दिया। उड़ान उसकी अपनी है।
परदेसी चिड़िया....भव्या
साल भर से मेरे घर आई नहीं
मां
शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें