भाषा / Language
कल रंग पड़ गया
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कल रंग पड़ गया .....
इस साल का
मुझमें तो तुम्हारा पड़ा ही हुआ
अगले कुछ दिन रंगों में बीतने का मन है।
रंग मुबारक... तुमको
*रंग.....
तुम
न मिले
न मिलाया
बस फबे मुझ पर
*रंग...
तुम
हर किस्म
हर shade के
ज़रा कम जरा ज्यादा के बीच
मेरे लिए बचा हुआ
एक छींटा भर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें