कल्पनाशब्दों के बीच
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कल रंग पड़ गया

कल रंग पड़ गया ..... इस साल का मुझमें तो तुम्हारा पड़ा ही हुआ अगले कुछ दिन रंगों में बीतने का मन है। रंग मुबारक... तुमको *रंग..... तुम न मिले न मिलाया बस फबे मुझ पर *रंग... तुम हर किस्म हर shade के ज़रा कम जरा ज्यादा के बीच मेरे लिए बचा हुआ एक छींटा भर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें