भाषा / Language
खुद को सरल रखने की चाहना में मैंने हमेशा अक्षरों से श्रृंगा…
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खुद को सरल रखने की चाहना में मैंने हमेशा अक्षरों से श्रृंगार करना चाहा।
बस मेरी कल्पना को पता है कि मुझे किस हद तक उघाड़ कर रख देना है।
मुझे कहाँ और कितनी देर खूबसूरत होना है।
कितना मौन मलना है।
कहां पर चुप्पी सजानी है।
क्या ओढ़ कर सादी रहूँगी।
कितना प्रेम और लिखना बाक़ी है।
कौन सी उदासी पर किस रंग की मुस्कान उकेरनी है।
कहाँ पर मुझमें ज़िन्दगी का नुक़्ता रखना है और कहाँ पर तुम्हारा वाला वो दिलकश तिल 😊😊😊
लिखना मेरा श्रृंगार है ...
शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें