कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2634

भाषा / Language

खुश हो

खुश हो ... तो एक किताब खुद को भेंट कीजिये... उदास हो तो कम से कम दो.... इस लिए नहीं कि उदासी लंबी चलेगी.... बस इस लिए कि किताब अपने एकांत में पढ़ी जानी चाहिए। उदासीन मन किताबों को पढ़ने की बेहतरीन जगह और वक़्त देता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें