कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2632

भाषा / Language

एक ही दुःख पर दो बार क्या उदास होना

एक ही दुःख पर दो बार क्या उदास होना.... कल नए दुःख लेंगे। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें