भाषा / Language
हमने दूसरों से प्रेम किया
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*हमने दूसरों से प्रेम किया....
उसके चले जाने पर प्रेम भी चला गया।
उदासी हमारी अपनी बनाई हुई है।
*इतिहास कभी नहीं पलटता
बस अन्त्यानुप्रास लगाते रहता है...
ठीक जैसे प्रेम
ठीक जैसे प्रेमी
*न तुमने रूठने से पहले मनाया न रूठने के बाद कभी.....
फिर भी रुकी हूँ।
जाने क्या बात थी।
*जिस रोज़ मैं रात होती हूँ तुम्हें मेरे भीतर तारा हो जाना चाहिए।
प्रेम के दुःख ...प्रेम के सुख में ही चिपके रहते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें