किसी रोज़ तुम्हारे द्वार पर दस्तक की तरह छूट जाऊँगी... जो भीतर आए... मेरे बाद ही आए ।
रचना 262318 मार्च 2021भाषा / Languageहिन्दीEnglishकिसी रोज़ तुम्हारे द्वार पर दस्तक की तरह छूट जाऊँगी✦किसी रोज़ तुम्हारे द्वार पर दस्तक की तरह छूट जाऊँगी... जो भीतर आए... मेरे बाद ही आए ।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें