भाषा / Language
हमने अपने पुराने दुःख से कुछ न सीखा
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हमने अपने पुराने दुःख से कुछ न सीखा
हम हँस दिए।
इसी हँसी को ईश्वर ने परख पर रखा
नए दुःख कड़े थे
रोकर रुक कर हम फिर हँस दिए
चलते
घिसते
उड़ते रहे।
"यही जीवन है" तुम सीख गए।
हालांकि ईश्वर ने ये कभी कहा नहीं...
पर अपना तराजू भी रखा नहीं।
दुःख और हँसी का बाट किसी ने नहीं देखा
ईश्वर के सिवा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें