कल्पनाशब्दों के बीच
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उसे सुंदर नहीं कह सकती।

उसे सुंदर नहीं कह सकती। वो जो कलात्मक है.... एक होता हुआ सृजन होती हुई साँस होता हुआ जीवन एक नींद होती हुई एक प्रेम जो हो रहा अभी ये सब रचनात्मक हैं ये सुंदर नहीं... ये होती हुई कला की सुंदरता है। लिख कर इसे सुंदर बना दो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें