कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2604

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हसीन तो सभी हैं

हसीन तो सभी हैं.... इस नज़र को एक महीन पश्मीने की तलाश है। तो दिखाओ कुछ ज़हीन मन 😊 काम से छूट कर फ़ोन हाथ में आता है तो शरारतें ही सूझती हैं। शब्दों के पासे हैं ...फैंको
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें