कल्पनाशब्दों के बीच
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आज सुबह सुशोभित जी के साथ हूँ। इनका लिखा आपको जकड़ लेता है।…

आज सुबह सुशोभित जी के साथ हूँ। इनका लिखा आपको जकड़ लेता है। प्रेम पाश में हूँ अभी। कितना कोशिश कर रही कि अगले पन्नों में पहुँचूँ पर किताब की कुछ पंक्तियों में बस जाने का मोह छूट नहीं रहा। किताब का यह पन्ना मुझे आगे नहीं जाने दे रहा। 😊😊😊 आपको इस किताब के लिए लव यू कहा जा सकता है।मैं कह रही।💐💐💐 किताब पर मन लिखना मेरी आदत है ...पर आपको पढ़कर खुद खो गयी हूँ.... अपने पास पहुंच गई हूं। बस मनचाही पंक्तियां किताब में रेखांकित की हैं।😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें