भाषा / Language
मैं ....."किताब
✦
मैं ....."किताब"
कल्पना की उड़ान भरने वाली
मैं ....."किताब"
कब तकनीक की गिरफ्त में आ गई
पता ही नहीं चला
जाने कब उलझ कर
इक चौकोर में सिमट गयी
क़ैद कर ली गयी
चार दिवारी में
इल्म ही नहीं हुआ
न पन्ना उलटने का सबर रहा
न सियाही बिखरने का डर
अब धूल भी नहीं जमती मुझ पर
न मेरे हर्फ़ पीले पड़ते कभी
ओना कोना नहीं मुड़ता मेरा
न वो स्पर्श महसूस होता कभी
न वो फड़फड़ाहट सुनाई देती कभी
बिलकुल नयी नवेली सी
एक दम कोरी
"ई बुक" कहाने लगी हूँ
क्या करूँ ?
कागज़ ही छूट गया मुझसे
वो ....जो मुहाफ़िज़ था मेरा
मेरी लेखनी का
न अलमारियों में सजती हूँ
न जिल्द ही चढ़ती है मुझ पर
लेने देने का सिलसिला
तो कब का रुक गया
अब मैं बटनों की गुलामी करती हूँ
मेरे औराक़ की सौंधी खुश्बू
याद नहीं करता कोई
सूखे गुलाब ,मोर पंख ...,
न जाने कहाँ खिसक कर
गिर पड़े हैं इन हर्फों से
न सिरहाने रखता है कोई
न किसी के सीने से लगकर सोती हूँ
चाहता नहीं ढोना मेरा बोझ कोई
सब कृत्रिम सब आधुनिक
अब तो बस नाम ही रह गया शेष
निशाँ तो हो ही गए समझो अवशेष
कितना कुछ कह देने वाली
मैं ......."किताब"
बेज़ुबान हो गयी हूँ
अपनी ही जन्मी इस सोच
इस तकनीक की
मुलाज़िम हो गयी हूँ
मैं...... "किताब"
कहीं खो गयी हूँ
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें