कल्पनाशब्दों के बीच
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बेहद शांत उदास बोझिल दिन का क्या करती हो कल्पना

बेहद शांत उदास बोझिल दिन का क्या करती हो कल्पना? रात चूम कर प्रेमी कर देती हूँ.. अगले दिन की मुस्कान बन जाती है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें