ककल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2502

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मन को ईश्वर ने इसलिए भी होंठ और जुबां नहीं बख्शी कि वो शब्द…

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मन को ईश्वर ने इसलिए भी होंठ और जुबां नहीं बख्शी कि वो शब्दों से अछूता रहे ।शब्दों से कलुषित न हो। मन मौन से ही लिखा जा सकता है। मौन में मन तो है ही लिखा हुआ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें