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मन का द्वंद जब सांखल नहीं झरोखा खोले

मन का द्वंद जब सांखल नहीं झरोखा खोले .... तो समझो प्रीत हुई। इश्क़ वाली फरवरी ... अभी सुबह💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें