ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2468

भाषा / Language

मैं अपने साथ जब भी गुज़रती हूँ

✦
मैं अपने साथ जब भी गुज़रती हूँ.... परछाई में प्रेमिका असल में प्रेमी नज़र आती हूँ। मुझे प्रेम नहीं उसकी दोस्ती भेद कर निकलती है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें