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न जाया करने को हर्फ़ थे

*न जाया करने को हर्फ़ थे, न खर्च करने को रोशनाई थी, रूह को लिखा आँखों से पैगाम जो कमा ली वो सिर्फ़ तन्हाई थी। *गम को नुमाईश में रख कर क्या करेंगे? इधर खरीददार ही हँसी के आते हैं। *तुम भी होते तो अच्छा था..... इससे उदास और क्या लिखती? शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें