कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2433

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हम पहले प्रेम में पड़ते हैं

हम पहले प्रेम में पड़ते हैं फिर उसकी सहेज में पड़े रहते हैं। प्रेम में जादुई होना है? तो खुद से बागी रहो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें