कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2402

भाषा / Language

बस एक ही दगा याद है

*बस एक ही दगा याद है.... उस रोज़ सी आँखें मिली ही नहीं। *एक रोज़ था जब इंतज़ार में मायूस रहती थी... अब बेलौस तुममें रह कर इंतज़ार को मायूस कर देती हूँ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें