लफ़्ज़ों की चोट जरा कम कर देते ...... गीला अंतस ना तह होता है........ ना बिछता है शुभरात💐
रचना 240116 दिसंबर 2020भाषा / Languageहिन्दीEnglishलफ़्ज़ों की चोट जरा कम कर देते✦लफ़्ज़ों की चोट जरा कम कर देते ...... गीला अंतस ना तह होता है........ ना बिछता है शुभरात💐कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें