कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 2401

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लफ़्ज़ों की चोट जरा कम कर देते

लफ़्ज़ों की चोट जरा कम कर देते ...... गीला अंतस ना तह होता है........ ना बिछता है शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें